भोपाल. भारतीय प्रशासनिक सेवा के मध्यप्रदेश कॉडर के दो बैच को इस महीने की पहली तारीख को पदोन्नति मिलना थी, लेकिन केंद्र और राज्य के बीच मामला अटक गया है। पदोन्नति के लिए पदों का निर्धारण केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय राज्य शासन से जानकारी मिलने के बाद करता है। यहां से भेजी गई जानकारी को कार्मिक मंत्रालय से हरी झंडी नहीं मिलना पदोन्नति में देरी की वजह माना जा रहा है।
1995 बैच के अफसरों को अपर सचिव से सचिव पद पर पदोन्नति मिलना है और 1998 बैच को उपसचिव से अपर सचिव पद पर प्रमोशन डच्यू है। वर्ष 2007 से पहले पदोन्नति के लिए पदों की गणना राज्य शासन ही करता था। लेकिन 2007 से केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ही यह काम करता है। गौरतलब है कि 1995 बैच में खंडवा कलेक्टर डीडी अग्रवाल और सागर कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव शामिल हैं।
इसके अलावा सचिन सिन्हा, अशोक शिवहरे,रामकिंकर गुप्ता,राजकुमार माथुर,भरत कुमार व्यास,महेंद्र सिंह भिलाला,डीपी अहिरवार भी इसी बैच के अफसर हैं। जबकि 1998 बैच में भी आधे अधिकारी विभिन्न जिलों में कलेक्टर पदस्थ हैं।
आकाश त्रिपाठी,मुकेश चंद गुप्ता,निकुंज कुमार श्रीवास्तव,कामता प्रसाद राही,राजेंद्र कुमार शर्मा,महेंद्र ज्ञानी,पुष्पलता सिंह,श्यामसुंदर बंसल,गणेश प्रसाद कबीरपंथी,राजेश प्रसाद मिश्रा और उर्मिला मिश्रा इस बैच में शामिल हैं।
समय से पहले भी मिले हैं प्रमोशन
उपसचिव से अपर सचिव पद के लिए प्रमोशन 13 साल में मिलता है जबकि अपर सचिव से सचिव पद पर 15 साल पूरे होने पर और सचिव से प्रमुख सचिव पद के लिए प्रमोशन 24 साल पूरे होने पर मिलता है। यह पदोन्नति नया साल शुरू होते ही दी जाती है।
गौरतलब है कि 1986 बैच के अधिकारियों को सचिव से प्रमुख सचिव पद पर वक्त से चार महीने पहले ही पदोन्नति मिल गई। गौरतलब है कि 1994 बैच के अधिकारियों को भी अपर सचिव से सचिव पद के लिए एक साल देर से पदोन्नति मिली थी। इसी तरह 1984 बैच को भी पदोन्नति मिली थी।
1995 बैच के अफसरों को अपर सचिव से सचिव पद पर पदोन्नति मिलना है और 1998 बैच को उपसचिव से अपर सचिव पद पर प्रमोशन डच्यू है। वर्ष 2007 से पहले पदोन्नति के लिए पदों की गणना राज्य शासन ही करता था। लेकिन 2007 से केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ही यह काम करता है। गौरतलब है कि 1995 बैच में खंडवा कलेक्टर डीडी अग्रवाल और सागर कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव शामिल हैं।
इसके अलावा सचिन सिन्हा, अशोक शिवहरे,रामकिंकर गुप्ता,राजकुमार माथुर,भरत कुमार व्यास,महेंद्र सिंह भिलाला,डीपी अहिरवार भी इसी बैच के अफसर हैं। जबकि 1998 बैच में भी आधे अधिकारी विभिन्न जिलों में कलेक्टर पदस्थ हैं।
आकाश त्रिपाठी,मुकेश चंद गुप्ता,निकुंज कुमार श्रीवास्तव,कामता प्रसाद राही,राजेंद्र कुमार शर्मा,महेंद्र ज्ञानी,पुष्पलता सिंह,श्यामसुंदर बंसल,गणेश प्रसाद कबीरपंथी,राजेश प्रसाद मिश्रा और उर्मिला मिश्रा इस बैच में शामिल हैं।
समय से पहले भी मिले हैं प्रमोशन
उपसचिव से अपर सचिव पद के लिए प्रमोशन 13 साल में मिलता है जबकि अपर सचिव से सचिव पद पर 15 साल पूरे होने पर और सचिव से प्रमुख सचिव पद के लिए प्रमोशन 24 साल पूरे होने पर मिलता है। यह पदोन्नति नया साल शुरू होते ही दी जाती है।
गौरतलब है कि 1986 बैच के अधिकारियों को सचिव से प्रमुख सचिव पद पर वक्त से चार महीने पहले ही पदोन्नति मिल गई। गौरतलब है कि 1994 बैच के अधिकारियों को भी अपर सचिव से सचिव पद के लिए एक साल देर से पदोन्नति मिली थी। इसी तरह 1984 बैच को भी पदोन्नति मिली थी।
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